वास्तु पुरूष मंडल – विस्तृत व्याख्या

वास्तु पुरूष मंडल की विस्तृत व्याख्या

आज हम समजते वास्तु पुरूष मंडल क्या है और उसकी विस्तृत व्याख्या। कल हमने वास्तु पुरूष की अद्भुत कहानी पढ़ी।

वास्तु पुरूष मंडल

कल हम देखा था कि वास्तु पुरूष पूर्वोत्तर दिशा में अपने सिर और दक्षिणी-पश्चिमी दिशा की तरफ आपने पैर को जमीन के साथ कील ठुकाकर बांध दिया था। वास्तु पुरूष को बांधने के लिए ४५ देवता (ब्रह्मा सहित) का सामूहिक प्रयास था। कल्पना करो की वह कितना शक्तिशाली था!

वास्तु पुरूष मंडल को ९ × ९ = ८१ भागों में विभाजित किया गया है (आरेख में दिखाया गया है), प्रत्येक भागको जिस देवताने वास्तु पुरूष को नीचे बांध कर रख उस हिस्से में उनका नाम दिया है। बाहरी हिस्सों में ३२ देवता और आंतरिक भाग में १३ देवता हैं। इसका मतलब यह है कि वास्तु पुरूष मंडल में विभिन्न देवताओं की मौजूदगी है और मानव जीवन के विभिन्न हिस्सों पर अपने गुणों के अनुसार यह देवता शासन करते हैं।

वास्तु पुरूष मंडल

वास्तु पुरूष मंडल

यह एक कारण है कि एक घर में कमरे बनाने के दौरान, हम यह सुनिश्चित करते हैं कि उस क्षेत्र के किसी भी देवता का वास्तु पुरूष मंडल में अपमान न हो। वास्तु शास्त्र हर समय सभी देवताओं को खुश रखने के लिए दिशा-निर्देश और सिद्धांत देता है।

इसलिए वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि किसी भवन का निर्माण वास्तु पुरूष मंडल के अनुसार किया जाता है तो इमारत में समृद्धि होती है और निवासियों को हमेशा खुशाली, स्वस्थ, संतुष्टी और धनलाभ होता है।

मनुष्य के रूप में, समय के आधार पर, हम एक दिन में कई कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए, हम रात को सोते हैं, सुबह उठते हैं, दिन में काम करते हैं और फिर रात में सोते हैं। इसके अलावा, हम इन सभी गतिविधियों को घर या किसी अन्य भवन में विभिन्न स्थानों पर, जैसे कि कार्यालय, कार्यशाला आदि मे करते हैं।

हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी के घूमने के कारण एक दिन में हमारे पास २४ घंटे हैं और इस के कारण २४ घंटे के दौरान सूर्य के प्रकाश की स्थिति लगातार बदलती है। २४ घंटे की अवधि के दौरान पृथ्वी के संबंध में सूर्य की स्थिति पर निर्भर करते हुए, हमारे प्राचीन ऋषियों ने घर के विभिन्न कमरों को ऐसे तरीके से निर्माण किया था ताकि दिन में किसी भी समय काम के स्थान पर, मनुष्यों को सर्वोत्तम सूर्यकी किरण मिलें।

वास्तु पुरूष मंडलमें दिशा के आधार पर कमरे के स्थान के महत्व को समझें: -

  • उत्तर-पूर्व: सुबह सुबह ३:०० से ६:०० बजे तक, सूर्य घर के पूर्वोत्तर भाग में है। ३:०० बजे से ६:०० बजे के समय के इस अवधि को ब्रह्मा माहुरत कहा जाता है और ध्यान, योग, व्यायाम या अध्ययन के लिए सर्वोत्तम है। इसलिए घर के पूर्वोत्तर भाग पूजा / प्रार्थना कक्ष, बैठक कक्ष या अध्ययन कक्ष के लिए सबसे उपयुक्त है।
  • पूर्व: सूर्य घर के पूर्व हिस्से में सुबह ६:०० बजे से ९:०० बजे तक रहता है, यह समय तैयार होने और दिनकी शुरुआत करने के लिए सबसे अच्छा है। इसलिए पूर्वी बाथरूम के लिए सबसे उपयुक्त है (केवल बाथरूम, न कि शौचालय)। हालांकि, इस भाग को कमरे में रहने, अविवाहित बच्चों के बेडरूम, अतिथि बेडरूम, भोजन कक्ष, पूजा कक्ष और यहां तक कि अध्ययन कक्ष के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • दक्षिण-पूर्व: ९:०० से १२:०० दोपहर का समयमें सूर्य घर के दक्षिण-पूर्व भाग में होता है और इस समय भोजन की तैयारी और नौकरी पर जाने के लिए सबसे अच्छा होता है। इसलिए यह स्थान पर एक रसोईघर, कार्यालय या अविवाहित बेटे के बेडरूम को रखने के लिए सबसे उपयुक्त है।
  • दक्षिण: १२:०० बजे दोपहर और ३:०० के बीच का समय काम करने का समय है। इस समय के दौरान सूर्य दक्षिणी भाग में है और इसलिए यह स्थान कार्यालय के लिए अच्छा है। इस भाग में, सूर्य के प्रकाश की तीव्रता बहुत अधिक है और इसलिए दक्षिण का उपयोग एक स्टोर रूम, सीढ़ी और शौचालयों के रूप में भी किया जा सकता है।
  • दक्षिण-पश्चिम: दोपहर का भोजन के बाद ३:०० बजे से शाम ६:०० बजे तक आराम करने का समय है। इस समय के दौरान सूर्य दक्षिण-पश्चिम भाग में है और इसलिए यह स्थान मास्टर बेडरूम के लिए सबसे अच्छा है। इसके अलावा, एक सीढ़ी या मजबूत कमरे यहां स्थित हो सकते हैं।
  • पश्चिम: शाम ६:०० बजे से रात ९:०० बजे के बीच का समय आराम करने और भोजन करने का सबसे अच्छा समय है। यही कारण है कि यह घर में भोजन कक्ष के लिए सबसे अच्छा स्थान है। बच्चों के शयन कक्ष, प्रार्थना कक्ष, अध्ययन कक्ष या सीढ़ी को बनाने के लिए इस हिस्से का उपयोग भी कर सकते है।
  • उत्तर-पश्चिम: ९:०० बजे से रात १२:०० के बीच का समय आराम करने और सोनेका समय है। इसलिए यह स्थान एक बेडरूम के लिए सबसे उपयुक्त है। हालांकि, यह भाग भी बैठक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • उत्तर: १२:०० बजे से ३:०० बजे तक का समय गुप्तता और अंधकार का समय है; इसलिए घर के इस हिस्से में तिजोरी या मजबूत कमरे के लिए सबसे उपयुक्त है। हालांकि, यह भाग भी बैठक या भोजन कक्ष के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।

मुझे पता है, वास्तु पुरूष मंडल में हर दिशा को याद रखना आपके लिए मुश्किल होगा, लेकिन आप की सुविधा के लिए निचे रखी आरेख को देख सकते हैं।

वास्तु पुरूष मंडल

इस लेखको आप इंग्लिशमें पढ़ने के लिए क्लिक करे Vastu Purusha Mandala.

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Manisha Joshi is a Vastu and Feng Shui consultant with experience of 15+yrs. She also expertise in Crystal Healing, Astrology and Numerology. She is a Reiki Master and Chakra Healer healing people with concepts of Mind Power and Power of Positivity.

One comment on “वास्तु पुरूष मंडल – विस्तृत व्याख्या

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