वास्तु पुरूष – वास्तुशास्त्र के आधार

वास्तु पुरूष के जन्म को दर्शाते हुए प्राचीन भारतीय ग्रंथों की एक दिलचस्प कहानी है। यह कहानी वास्तु पुरुषा मंडल (वास्तु शास्त्र का आधार) भी बताती है। यह कहानी बताती है की जब उन्होंने अराजकता पैदा की तो कैसे अलग-अलग देवताओं के सामूहिक प्रयासों ओर बलसे उनका निर्माण हुआ।

वास्तु पुरूष की दिलचस्प कहानी

वास्तु पुरूष की दिलचस्प कहानी

यह सब शुरू हुआ जब भगवान ब्रह्मा ने ब्रह्मांड बनाया और कुछ प्राणियों को बनाने के लिए प्रयोग कर रहे थे। उन्होंने सोचा कि एक “आदमी” इस के लिए सबसे अच्छा विकल्प होगा और इसलिए उसने एक आदमी बनाया। लेकिन यह कोई साधारण आदमी नहीं था, वह बहुत बड़ा था और भारी शक्तियां थी उसमे। उसके सृजन के तुरंत बाद, वह आकर से बढ़ने लगा।

जैसे समय बीतने लगा, वह बहुत बड़ा हो गया और उसके आकार के साथ, उसकी भूख भी बढ़ गई। वह कुछ भी खाने लगा। उसने सब कुछ खाया जो उसके रास्ते आता गया और वहाबड़ता गया। इस वजसे एक समय आया की वह इतना बड़ा हो गया कि उसकी छाया ने पृथ्वी पर एक स्थायी ग्रहण लगा दिया था।

यह पूरे प्रकरण की वजसे भगवान शिव और विष्णु, भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचे और अनुरोध किया कि वह मनुष्य को अराजकता फैलाने से रोक सके। भगवान ब्रह्मा ने समझ लिया कि उसने एक भयानक गलती हुई है और उने इसे सुधारने की जरूरत है। लेकिन यह मनुष्य भगवान ब्रह्मा के लिए बहुत शक्तिशाली था, इसलिए उन्होंने मदद के लिए आठ दिशाओं (अष्टा दीपालकस) के देवताओं से अनुरोध किया।

भगवान ब्रह्माके अनुरोध को सुनकर, आठ दिशाओं के देवता सहायता के लिए आए। उन्होंने उस व्यक्ति को पकड़ लिया और उसे कील ठुकाकर बांध दिया। उन्होंने उत्तर-पूर्व में उसके सिर और दक्षिण-पश्चिम दिशा में पैर जमीन के साथ कील ठुकाकर बांध दिया। इस घटना के दौरान भगवान ब्रह्मा ने केंद्र में कूद कर आदमी को पटक दिया।

इस वेदनासे पीड़ित होकर “आदमी” रोने लगा और भगवान ब्रह्मा को पूछा, “आप मेरे साथ यह क्यों कर रहे हैं?“, “आपने मुझे बनाया है और अब यह क्यों मेरे साथ किया जारहा है?” “मेरी गलती क्या है?” भगवान ब्रह्मा ने इस सवाल के जवाब में कहा,”मुझे पता है कि यह तुम्हारी गलती नहीं है, लेकिन तुम सभी के लिए खतरा बन गए हो। मैंने जो बनाया है उसे नष्ट नहीं करना चाहता हूं और इसलिए तुम्हे आब इसी तरह हमेशा के लिए रहना होगा।

लेकिन इस सब में मेरा क्या लाभ है?” आदमी ने पूछा। भगवन ब्रह्मा ने कहा, “मैं तुम्हे अमर बनाऊंगा और पृथ्वी पर किसी प्रकार के ढांचे का निर्माण करने वाले सभी नश्वर लोगों तुम्हारी पूजा करेंगे। यदि वे तुम्हारी पूजा नहीं करते हैं और तुम्हें खुश नहीं रखते हैं, तो तुम इन लोगों को परेशान कर सकते हो या खाभी सकते हो। तुम सभी जमीन में उपस्थित रहोगे और तुम अब से ही वास्तु पुरूष के रूप में जाने जाओगे।” इस वरदानसे ही वास्तु पुरूष सहमत हुए और हमेशा के लिए पृथ्वी का एक अविभाज्य हिस्सा बन गये।

यह वास्तु पुरूषकी दिलचस्प कहानी है। आप वास्तु पुरूष मंडल के बारे में सोच रहे होंगे। वास्तु पुरूष की कहानी से आप याद कर सकते हैं कि देवताओं ने जमीन पर वास्तु पुरूष को दबा दिया था। इसलिए उस जमीन का हिस्सा जहां वास्तु पुरूष को कील ठुकाकर बांधा था उसे वास्तु पुरूष मंडल कहा जाता है। चूंकि भगवान ब्रह्मा ने कहा कि वास्तु पुरूषकी पूरी धरती पर पूजा की जाएगी इसलिए किसी भी भूखंड या निर्माण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जमीन अपने आप में एक वास्तु पुरूष मंडल है।

वास्तु पुरूष मंडला को समझने का एक बेहतर तरीका नीचे लगाई गई छवि को देखे।

वास्तु पुरूष की दिलचस्प कहानी

कल हम समझते हैं कि वास्तव में वास्तु पुरूष मंडल क्या है और हम हर समय वास्तु पुरूष को खुश कैसे रख सकते हैं।

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Manisha Joshi is a Vastu and Feng Shui consultant with experience of 15+yrs. She also expertise in Crystal Healing, Astrology and Numerology. She is a Reiki Master and Chakra Healer healing people with concepts of Mind Power and Power of Positivity.

2 comments on “वास्तु पुरूष – वास्तुशास्त्र के आधार

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